विष्णु सहस्त्रनाम इन हिंदी pdf

PDF Nameविष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र | Shri vishnu sahasranama stotram pdf 
No. of Pages32
PDF Size0.07 MB
LanguageSanskrit
TagsStotram (स्तोत्रं), Ved Puran Upanishad
PDF CategoryReligion & Spirituality
Published/Updated29-03-2022
Source / Creditsvedpuran.net
Uploaded ByAdmin
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विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र | Sri Vishnu Sahasranama Stotram in Sanskrit PDF download link is available below in the blog article, download PDF of विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र | Sri Vishnu Sahasranama Stotram in Sanskrit using the direct link given at the bottom of this content

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।

प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ १॥

यस्य द्विरदवक्त्राद्याः पारिषद्याः परः शतम् ।

विघ्नं निघ्नन्ति सततं विष्वक्सेनं तमाश्रये ॥ २॥

व्यासं वसिष्ठनप्तारं शक्तेः पौत्रमकल्मषम् ।

पराशरात्मजं वन्दे शुकतातं तपोनिधिम् ॥ ३॥

व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे ।

नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नमः ॥ ४॥

अविकाराय शुद्धाय नित्याय परमात्मने ।

सदैकरूपरूपाय विष्णवे सर्वजिष्णवे ॥ ५॥

यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात् ।

विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे ॥ ६॥

ॐ नमो विष्णवे प्रभविष्णवे ।

श्रीवैशम्पायन उवाच —

श्रुत्वा धर्मानशेषेण पावनानि च सर्वशः ।

युधिष्ठिरः शान्तनवं पुनरेवाभ्यभाषत ॥ ७॥

युधिष्ठिर उवाच —

किमेकं दैवतं लोके किं वाप्येकं परायणम् ।

स्तुवन्तः कं कमर्चन्तः प्राप्नुयुर्मानवाः शुभम् ॥ ८॥

को धर्मः सर्वधर्माणां भवतः परमो मतः ।

किं जपन्मुच्यते जन्तुर्जन्मसंसारबन्धनात् ॥ ९॥

English Desciption of Sri Vishnu Sahasranama Stotram

According to the legend behind this, once Yudhishthira, the eldest of the five Pandavas, was confused about the most significant religion to follow in life. So Yudhisthira went to Pitamah Bhishma. Yudhishthira sought guidance from Bhishma on all aspects of life through 6 questions; when Bhishma answered and said that whoever has donated life to Yudhishthira, everyone should surrender before him, meditating on his thousand names, the person should be saved from all sins. And Vishnu told 1000 names of Lord Vishnu. In the Kurukshetra battlefield, Maharishi witnessed Vedavyasa and Sri Krishna’s teaching and which part of the Mahabharata was given the name Vishnu Sahasranama.

Lord Vishnu is the preserver of life and maintains this creation. Lord Vishnu sustains many forms of life to flourish on earth. Many sacred stocks are praying to Vishnu. The most influential of all is known as Vishnu Sahastra. L

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विष्णु सहस्रनाम vishnu sahasranama stotram की कथा

इसके पीछे की कथा के अनुसार एक बार पांचों पांडवों में सबसे बड़े युधिस्टर जीवन में पालन करने वाले सबसे बड़े धर्म को लेकर भ्रमित थे। तो युधिस्टर पितामह भीष्म के पास गए। युधिष्ठिर ने 6 सवालों के माध्यम से भीष्म से जीवन के सभी पहलुओं पर मार्गदर्शन मांगा जब भीष्म ने उत्तर देते हुए कहा कि जिसने भी युधिष्ठिर को जीवन का दान दिया है उसके समक्ष सभी को समर्पण कर देना चाहिए उनके हजार नामों का ध्यान व्यक्ति को सभी पापों से मुक्त कर देगा और विष्णु ने भगवान विष्णु के 1000 नाम बताएं कुरुक्षेत्र युद्ध के मैदान में महर्षि वेदव्यास और श्रीकृष्ण के शिक्षण के साक्षी थे और महाभारत के किस भाग को विष्णु सहस्त्रनाम दिया गया।

विष्णु सहस्त्रनाम का महत्व

भगवान विष्णु जीवन के संरक्षक हैं और इस सृष्टि के पालन करता है भगवान विष्णु पृथ्वी पर पनपने के लिए जीवन के अनेक रूपों का निर्वाह करते हैं विष्णु को प्रार्थना करने वाले अनेक पवित्र स्टॉक सभी में सबसे जो प्रभावशाली हैं उसे विष्णु सहस्त्र नाम से जाना जाता है l

विष्णु सहस्त्रनाम में 149 अध्याय 14 से लेकर 20 श्लोक है।

विष्णु सहस्त्रनाम जाप करने के लाभ

अनेक ज्योतिषियों का मानना है कि विष्णु सहस्त्रनाम vishnu sahasranama stotram जाप करने के अनेकों नाम है इसका जाप करने से या सुनने से पाप और भय दूर होते हैं।

यह सौभाग्य लाता है आत्मविश्वास बढ़ाता है रोगों को दूर करता है।

विष्णु सहस्त्रनाम पाठ करने के नियम

  • इसका पाठ हमेशा व्रत रखकर ही किया जाता है
  • व्रत का पारण सात्विक और उत्तम भोजन से ही करें।
  • पाठ करने के लिए पीले वस्त्र पहनकर ही पाठ करें।
  • पाठ करते वक्त बीच में कोई कार्य न करें।
  • पाठ करने से पूर्व श्रीहरि की विधिवत पूजा करने के बाद गुण अथवा पीली मिठाई अर्पित करें।
  • पाठ करने के लिए विष्णु सहस्त्रनाम स्त्रोत पुस्तिका को सम्मान पाठ पर विराजमान करके पाठ करें।
  • पाठ करने के बाद उन्हें भगवान श्री विष्णु की पूजा करें और फिर आरती के बाद प्रसाद वितरण करें।
  • और कोई मनोकामना हो तो इस पाठ को हर बृहस्पतिवार जरूर करें।

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