Mahabharat in Hindi PDF संपूर्ण महाभारत डाउनलोड करें

Gita Press गोरखपुर से प्रकाशित सम्पूर्ण महाभारत mahabharat in hindi pdf (mahabharat katha) के प्रथम खण्ड ‘आदिपर्व और सभापर्व’ की भूमिका में स्पष्ट लिखा है- महाभारत आर्य-संस्कृति तथा भारतीय सनातन धर्म का एक अद्भुत और महान ग्रन्थ तथा अमूल्य रत्नों का भण्डार है। 

भगवान वेदव्यास स्वयं कहते हैं की  ”इस महाभारत mahabharat में मैंने वेदों के रहस्य और विस्तार, उपनिषदों के सम्पूर्ण सार, इतिहास पुराणों के उन्मेष और निमेष, चतुर वर्णो के विधान, पुराणों के अर्थ, ग्रह नक्षत्र, न्याय, शिक्षा, चिकित्सा, दान, पाशुपत तीर्थों, पुण्य देशों, नदियों, पर्वतों, वनों तथा समुद्रों का भी वर्णन है।” 

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महाभारत Mahabharat में कितने पर्व हैं ?

 

जो महाभारत ( mahabharat in hindi pdf ) में वर्णित है वह संसार में आपको कहीं ना कहीं पर अवश्य होगा। सम्पूर्ण महाभारत में लगभग 1,10,000 श्लोक है। महाभारत काव्य अनेक नामो  जय, भारत और महाभारत नाम से प्रसिद्ध है।  पतंजलि योग सूत्र

पतंजलि योग सूत्र patanjali yoga sutras pdf

mahabharat katha में कुल 18 पर्व है जो की निम्नलिखित है-

 

  1. आदि पर्व, 2. सभा पर्व, 3. वन पर्व, 4. विराट  पर्व, 5. उद्योग पर्व, 6. भीष्म पर्व, 7. द्रोण पर्व, 8. कर्ण पर्व, 9. शल्य पर्व, 10. सौप्तिक पर्व, 11. स्त्री पर्व, 12. शांति पर्व, 13. अनुशासन पर्व, 14. आश्वमेधिक पर्व, 15. आश्रम वासिक पर्व, 16. मौसल पर्व, 17. महा प्रास्थनिक पर्व, 18. स्वर्गारोहण पर्व।

 

महाभारत काव्य में कुल मिलाकर 1948 अध्याय है। इसलिए महाभारत को शत सहस्त्र संहिता भी कहा जाता है। महाभारत में वर्णन किये गए स्थान आज भी इसकी वास्तविकता को प्रमाणित करते है।

 

महाभारत के रहस्य 

Mahabharat pdf

 

1) संघर्ष – 

इस ग्रंथ का श्री गणेश अर्थात आरम्भ ही संघर्ष से हुआ है। माता गंगा को पाने के लिए शांतनु (जो की भीष्म के पिता थे ) का संघर्ष  औरअंबा, अंबालिका या भीष्म पितामह का संघर्ष इसमें यही सिखाया गया है कि जीवन में कभी संघर्ष से भागना नहीं चाहिए। पांडवो का संघर्ष तो सभी को मालूम है। पांडवो ने अनेकों संघर्ष करके ही अपने राज्य को फिर से हासिल किया था।

 

2) निर्णय– 

मनुष्य को अपने जीवन में खुद ही निर्णय लेना चाहिए न कि दूसरे के निर्णय को स्वीकार करना चाहिए। दूसरे के निर्णय को स्वीकार करने का अर्थ है की आप खुद को उसके आधीन यानि की गुलाम कर देते है। महाभारत में कई पात्र खुद निर्णय न लेकर दूसरे के लिए गए निर्णय को अपना भाग्य स्वीकारते है। इसलिए व्यक्ति को स्वयं निर्णय लेने में सक्षम होना चाहिए। अपने विवेक और संयम से निर्णय लेना खुद के साथ ही सामज और संसार का भी हित करता है।

 

3) खुद पर विश्वास रखना चाहिए – 

धृतराष्ट्र ने जिस प्रकार से साम्राज्य प्राप्त किया और दुर्योधन ने चतुराई के साथ राजपथ अपने हाथ में ले लिया था, इसी कारण से ही इतना बड़ा महाभारत का युद्ध हुआ। अगर धृतराष्ट्र स्वयं निर्णय लेते और अपने आप पर विश्वाश यकीन करते तो शायद दोनों पक्षों को नुकसान से बचाया जा सकता था। इसलिए स्वयं पर विश्वास करना अधिक आवश्यक है।

 

4) डर को दूर भगाना – 

महाभारत में जीवन केलगभग हर पहलू को दर्शाया गया है जिनमे ‘डर’ का भी स्थान है। धृतराष्ट्र को अपने राजपाठ के जाने का डर था। कर्ण को अपनों के सामने युद्ध का डर था तो दुर्योधन को अपनी और सेना को पांडवो के द्वारा हार जाने का डर था। इससे यही सीख मिलती है कि मनुष्य ‘डर’ के अधीन होने पर कोई निर्णय सही नहीं ले पाता है। ‘डर’ में लिया हुआ निर्णय बाद में हमेशा पछतावे का कारण बन जाता है।

 

महाभारत कथा के बारे में और अधिक More About Mahabharat Katha

Mahabharat

 

जो कुछ भी जीवन में प्रत्याशित और अप्रत्याशित घटित होता है उसे विधाता ने पहले से ही मनुष्य की जीवनी में लिखा हुआ होता है। उसी के अनुसार ही मनुष्य अपने जीवन में चलने के लिए मजबूर हो जाता है।

रामायण और महाभारत जैसी कथाओ में भी इन बातो का बहुत उल्लेख है। इसीलिए रामायण और महाभारत में ईश्वर के साक्षात अवतार होते हुए भी भगवान को भी विधाता अर्थात अपने द्वारा लिखे हुए मार्ग पर चलना पड़ा था।

 

Mahabharat के रचनाकार की इस बात से पता चलता है कि यह अत्यन्त महान ग्रन्थ है। वास्तव में यह विश्व का सबसे लम्बा महाकाव्य भी है। इसमें अनेकोपर्व हैं एवं सभी पर्वों सहित कुल 1948 अध्याय हैं। इसमें कुल मिलाकर एक लाख से अधिक श्लोक हैं। इसीलिये इसे ‘शतसाहस्त्र संहिता’ भी कहा जाता है। 

कुछ एक  विद्वान इसके अतने अधिक वर्णनों के कारण इसे ऐतिहासिक नहीं मानते मगर इसे अनैतिहासिक भी नहीं कहा जा सकता। इसमें वर्णित कई स्थल अभी भी मौजूद हैं जो इसकी ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते हैं। आजकल ज्यादातर विद्वान और शोधकर्ता  महाभारत युद्ध को एक ऐतिहासिक घटना मानते हुये इसका समय 1400 ई. पू. से 1000 ई. पू. के बीच निर्धारित करते हैं।

 

महाभारत के बारे में कुछ विशेष तथ्य

प्रो. बी. बी. लाल द्वारा महाभारत में बताये गए कई स्थलों पर खुदाई कराई गई है। महाभारत में वर्णित ग्रहों की स्थिति के अनुसार महान वैज्ञानिक आर्यभट्ट ने महाभारत की अनुमानित तिथि 3100 ई. पू. निर्धारित की है। 

 

इस ग्रन्थ की रचना इसके काफी बाद में हुई। कहा जाता है कि इसकी रचना में लगभग 1000 वर्ष लगे और यह 500 ई. पू. से आरम्भ होकर 500 ई. तक चली।

 

महाभारत से हमें उस समय के सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास की एक सम्पूर्ण और अति सूंदर झाँकी प्राप्त होती है। इसमें आदर्श जीवन जीने के अनेको नियमों का संग्रह है।

 

 श्रीमद्भगवद्गीता, mahabharat katha का सर्वाधिक शिक्षाप्रद भाग है। मानव की प्रत्येक समस्या का समाधान इसमें निहित है। इसे भी आप हमारी वेबसाइट पर पढ़ सकते है और फ्री में डाउनलोड भी कर सकते है|

 

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भारतीय इतिहास के महान नायकमहात्मा गाँधी ने लिखा है, ”जब कभी मुझे निराशा घेरती है और कहीं से कोई प्रकाश की किरण दिखाई नहीं देती है तो मैं अविलम्ब भगवद्गीता (Bhagavad Gita) के पास जाता हूं। जहाँ-तहाँ कुछ श्लोकों को टटोलते/ढूंढते ही घोर निराशा के अन्धकार में भी प्रसन्नता की एक किरण चमक उठती है।”

 

महाभारत एक ऐसा प्रेरणादायक ग्रन्थ है जिससे शिक्षा लेकर मानव अपने और अपने समाज काउज्जवल चरित्र का निर्माण कर सकता है। वह नैतिकता के मानदण्डों को स्थापित करने में पूर्णतः सक्षम है। इसका सकारात्मक अध्ययन हमें हर एक क्षेत्र में सफलता दिला सकता है।

 

हम आशा करते है की आपको आज की हमारी पोस्ट Mahabharat in Hindi PDF | संपूर्ण महाभारत डाउनलोड  पसंद आयी होगी | 

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