जयशंकर प्रसाद के नाटक | jaishankar prasad Natak Sangrah PDF Download

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Book Namejaishankar prasad ke natak
No. of Pages269
PDF Size11.54 MB
Languagehindi
PDF CategoryNovels
Published/UpdatedMarch 16, 2022
Source / Creditshttps://archive.org/
Uploaded Byadmin

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पुस्तक का विवरण

मुंशी प्रेमचंद और jaishankar prasad प्रसाद जी को सामान्यतः हिंदी कहानियों की दो धाराओं के प्रवर्तक कथाकार के रूप में पहचाना जाता है। अर्थात प्रेमचंद सामाजिक यथार्थवादी धारा के प्रवर्तक और जयशंकर प्रसाद आदर्शवादी धारा के प्रवर्तक कहलाए जाते हैं।

jaishankar prasad
jaishankar prasad Natak

Pustak ka vivaran: premchand aur jayshankar- prasad ko samanyatah hindi kahaniyon ki do dharaon ke pravartak ke roop me maana jaata hai. Yaani munshi premchand yatharthvadi aur jaishankar prasad aadharshwadi.

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jaishankar prasad ka jivan parichay

जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय jaishankar prasad ka jivan parichay जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad) जी का जन्म 30 जनवरी 1889 ई० (माघ शुक्ल दशमी, संवत् 1946 वि.) को सप्ताह के गुरुवार के दिन काशी के सरायगोवर्धन में हुआ था।जयशंकर प्रसाद अनेक प्रतिभाओ के धनी साहित्यकार थे। उनका जन्म 1890 ईसवी काल में काशी के ‘सुंघनी साहू’ नामक सु प्रसिद्ध वैश्य परिवार में हुआ था। उनके यहां तंबाकू का बहुत व्यापार होता था।

उनके पिता का नाम  देवी प्रसाद और दादा का नाम शिवरत्न साहू था। इनके दादा जी परम शिवभक्त और दयालु थे। उनके पिता भी अत्यधिक उदार और साहित्य प्रेमी वयक्ति थे। प्रसाद जी का बचपन अत्यंत ही सुखमय था। अपने बचपन के समय में ही उन्होंने अपनी माता के साथ धारा क्षेत्र, ओंकारेश्वर, पुष्कर, उज्जैन और ब्रज आदि अनेक तीर्थों की यात्राएं की। यात्रा से लौटने के बाद पहले उनके पिता का और फिर उसके 4 वर्ष पश्चात उनकी माता का निधन हो गया।

jaishankar prasad ka jivan parichay – Jaishankar Prasad Ji was born on 30 January 1889 AD (Magh Shukla Dashami, Samvat 1946 V.) in Saraigovardhan, Kashi. Jaishankar Prasad was a writer of many talents. He was born in a well-known Vaishya family named ‘Sunghani Sahu’ of Kashi in 1890 AD. They had a lot of tobacco trade here.

His father’s name was Devi Prasad, grandfather’s name was Shivratna Sahu. grandfather was a great devotee of Shiva and kind. His father was also a very liberal and literary lover. Prasad had a very happy childhood. He traveled with his mother to many pilgrimages like Dhara Kshetra, Omkareshwar, Pushkar, Ujjain, Braj, etc. After returning from the journey, first, his father died, and then after 4 years, his mother died.

jayshankar prasad ki rachna ki सूची 

  • अग्निमित्र 
  • अज्ञात शत्रु 
  • एक घूंट 
  • कल्याणी परिणय 
  • करुणालय 
  • कामना 
  • चंद्रगुप्त 
  • जन्मेजय का नाग यज्ञ 
  • प्रायश्चित 
  • ध्रुवस्वामिनी 
  • राज्यश्री
  • विशाख
  • सज्जन
  • स्कंद गुप्त विक्रमादित्य

अग्निमित्र:-jaishankar prasad ki rachna

प्रसाद जी की यह अंतिम और ऐप पर समाप्त नाट्य कृति है जो कि इरावती उपन्यास में परिवर्तित हुई। इन के आरंभ में दृश्य संकेत और विभिन्न संवादों का अनुमान लगाना परिस्थिति वश मेरे लिए अनिवार्य हो गया। इसलिए पाठक मुझे क्षमा प्रदान करें।

-रतन शंकर प्रसाद

This is the last and finished theatrical work of jaishankar prasad ji, which turned into an Iravati novel, in the beginning of these, visual cues and guessing different dialogues became mandatory for me due to circumstance, so reader please forgive me

अग्निमित्र नाटक के पात्र

बृहद्र्व – सम्राट

पुष्यमित्र सेनापति

अग्निमित्र पुष्यमित्र का पुत्र

ब्लमित्र पुष्यमित्र का दूसरा पुत्र

पतंजलि

इरावति

भिक्षुक और सैनिक

अज्ञातशत्रु jaishankar prasad ki rachna:-

इतिहास में प्राय कर घटनाओं की पुनरावृत्ति होती ही रहती है। इसका तात्पर्य है यह कदापि नहीं है कि उनमें कोई नई घटना होती नहीं। किंतु असाधारण नहीं कटना भी भविष्य में पुनः होने की संभावना रखती है।

In history, the events are often repeated, this means that it does not mean that there is no new event in them, but there is a possibility of happening again in the future.

एक अंश –

लिच्छ्वियो का निमंत्रण स्वीकार कर गौतम ने उनकी विद्या को ग्रहण किया। पौधों की रामावती बचा अम्रपाली मां और इस नाटक की शाम आवश्यक 71 संगठन कुछ विचित्र तो होगा किंतु चरित्र का विकास और कौतुक का बढ़ाना ही इसका मुख्य उद्देश्य है। सम्राट अज्ञातशत्रु के समय में मगध साम्राज्य रूप में परिणत हुआ क्योंकि और वैशाली को इसने स्वयं जीता था और काशी अब बिना किसी विवाद के उनके अधीन हो गई थी। कौशल भी इनका एक मित्र राष्ट्र था। उत्तरी भारत में इतिहास का पहला ऐसा सम्राट हुआ। मथुरा के समीप पश्चिम गांव में मिली हुई अजातशत्रु की मूर्ति देखकर मिस्टर जैसवाल का संदेह है कि अज्ञातशत्रु  ने शायद पश्चिम में मथुरा तक भी विजय किया।

उषा के aangan में जागरण की एक लाली है दक्षिण पावन में शुभ मेघमाला का आंसर है। हटाने लग गया है पृथ्वी के प्रांगण में सुबह टहल रहा है। विशाल जल राशि के शीतल अंक से लिपट कर आया हुआ पवन इस द्वीप के निवासियों को कोई दूसरा संदेश नहीं केवल शांति का निरंतर संगीत सुनाया करता है।

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