सकारात्मक सोच – हिंदी PDF | Positive Thinking By Nepolian Hill In Hindi Book PDF Download

“अगर आप में विश्वास है तो आपके लिए कुछ भी संभव नहीं है ईश्वर हमेशा आपके साथ है वह हमेशा आपकी मदद करेगा। “

सकारात्मक सोच की शक्ति

 यह पुस्तक डॉक्टर सुधीर दीक्षित ने नॉर्मल विंसेंट पील के द्वारा लिखी गई द पावर आफ पॉजिटिव थिंकिंग को अनुवादित किया है।

दी पावर आफ पॉजिटिव थिंकिंग सकारात्मक चिंतन की पितामह कहे जाने वाले नॉरमन विंसेंट पील की अंतर्राष्ट्रीय बेस्टसेलर है। इसे डॉक्टर सुधीर दिक्षित ने हिंदी में अनुवादित किया है।

पुस्तक : पॉजिटिव थिंकिंग 

लेखक : नेपोलियन हिल

पुस्तक की भाषा : हिंदी

पेज : 78

नॉर्मन विंसेंट पील

इनका जन्म अमेरिका में एक निम्न मध्यम वर्गीय ईसाई परिवार में हुआ था। इन्होंने अपना जीवन एक चर्च में पादरी के रूप में स्टार्ट किया। उसके बाद धीरे-धीरे ये राजनीति में भी आएं,जहां इन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के विरोध में कई बार सभाएं भी आयोजित की ।इन्हें अमेरिका के सर्वोच्च नागरिक सम्मान द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।इन्होंने पत्रकारिता और रेडियो में भी काम किया। इनकी पुस्तक द पावर आफ पॉजिटिव थिंकिंग काफी कम समय में ही लोकप्रिय हो गई।

 इनकी यह पुस्तक आस्था व आशावाद के सिद्धांतों पर आधारित है।

पुस्तक के बारे में

सकारात्मक सोच – हिंदी

इस पुस्तक में लेखक उदाहरणों और तकनीकों को इस तरह से हमारे प्रत्यक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। जो हमें सिखाती हैं कि हमें कभी भी किसी चीज से हारना नहीं है। इसमें रोजमर्रा की वह उहापोह भरी जिंदगी की तमाम नाजुक समस्याओं का समावेश किया गया है। यह पुस्तक यह बताती है कि ,नही हमें अपने आसपास उपस्थित समस्याओं को, ना तो नजर अंदाज करना है ,ना ही उन्हें अपने ऊपर हावी होने देना है। यह पुस्तक इस तरह से लिखी गई है कि यह आपको बता सके कि यह पुस्तक आपके किस काम में आ सकती है।

इस पुस्तक की शुरुआत मैं लेखक अपने 20 लाख वे प्रति के उपलक्ष्य में अपने पाठकों का अभिवादन करता है।

 इस पुस्तक में लेखक अपने उदाहरणों और तकनीकों को 17 अध्याय के माध्यम से हमारे सम्मुख प्रस्तुत करता है इसमें प्रस्तावना तथा उपसंहार भी सम्मिलित है।

इसमें लेखक सामान्यता अपने किसी पर्ची चिर परिचित मित्र सहयोगी आदि के द्वारा सीखे गए या उन्हें अपने द्वारा बताए गए तकनीको को एक प्रेरक तरीके से प्रस्तुत किया है। इसमें लेखक हमारी हमारी समस्याओं को एक उदाहरण के रूप में उपलब्ध कराता है।

        प्रस्तावना

  1. अपने आप में विश्वास रखें।

हमेशा अपने आप में विश्वास रखें ।जब भी आप कुछ काम करें, तब अपने आप को भरोसा दिलाएं कि आप यह कर सकते हैं। उन्होंने बाइबल के ईसा मसीह के द्वारा कही गई बातों का जिक्र किया है। वे कहते हैं ,

   ” अगर आप में विश्वास है तो आप कुछ भी आपके लिए कुछ भी असंभव नहीं है ।”

 आगे वह कहते हैं ,

“अगर ईश्वर हमारे साथ है तो भला कौन हमारे खिलाफ हो सकता है ।”

  1.  शांत मस्तिष्क शक्ति देता है ।

लेखक कहते हैं कि जब भी हम कोई कार्य करते हैं या फिर किसी समस्या से घिरे रहते हैं ।तब हमें शांत मस्तिक से विचार करने की जरूरत होती है। कई बार ऐसा होता है कि हम जल्दबाजी में किसी सही होते हुए कार्य को भी जटिल बना देते हैं। इसलिए आवश्यक है की करने से पहले पहुंचा जाए।

  1. लगातार ऊर्जावान कैसे बना जाए ।

इसमें लेखक कहते हैं कि आप जैसा सोचेंगे वैसा ही बनेंगे

आगे लेखक बताते हैं, एक दिन वह एक खिलाड़ी को देखते हैं जो लगभग काफी तेज धूप में खेल रहा होता है ।उसका वजन काफी कम रहता है ।खेलते हुए ,अचानक लेखक को ऐसे लगता है कि वह गिरने वाला है ।खिलाड़ी पूरी तरह से थक चुका होता है ।उसकी पूरी ऊर्जा समाप्त हो चुकी रहती है।तभी लेखक देखता है की खिलाड़ी एक अनोखे तरीके से अपनी उर्जा को पुनः प्राप्त कर रहा है वे देखते हैं कि खिलाड़ी कुछ कहता है और फिर अपने मन में दोहराता है कि

” जो ईश्वर के सेवक हैं, वह अपनी ताकत फिर से पाएंगे।वह दौड़ेंगे पर रुकेंगे नहीं ।वह चलेंगे पर कमजोर नहीं होंगे। वह गरुण की तरह तेज आसमान में उड़ जाएंगे ,लेकिन गिरेंगे नहीं।

इसके बाद अचानक खिलाड़ी में पुनः एक नई ऊर्जा का संचार होता है और वह फिर से खेलने लगता है पूरी ऊर्जा के साथ।

आगे लेखक सर थॉमस अल्वा एडिसन की पत्नी के साथ उनके वार्तालाप का वर्णन करता है।जिसमें वह बताते हैं कि किस तरह जब सर थॉमस अल्वा प्रयोगशाला से असफल होकर आते थे तब वो काफी हद तक थके रहते थे फिर वो कुछ देर तक आराम से आराम करते थे। फिर जब उठते थे तब उनमें एक नई ऊर्जा रहती थी। वह पहले से ज्यादा सक्रिय रहते थे। सर थॉमस अल्वा जिन्होंने बल्ब का आविष्कार किया निश्चय ही उन्होंने लगातार उर्जा का संचार करना सीखा ,तभी तो वह आज इस जगत में जाने जाते हैं ।हमें हमेशा उन तरीकों पर केंद्रित रहना चाहिए जो हमें लगातार ऊर्जा प्रदान करें। हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें । हम ऊर्जावान रहने के लिए कई तरीकों जैसे कि प्रार्थना आराम कहीं घूमना लोगों से मिलना बातें करना किताबें पढ़ना इत्यादि का सहारा ले सकते हैं।

  1. प्रार्थना की शक्ति आजमाएं।
  2.  सुखी होना आपके हाथ में है ।

             एक दिन लेखक अपने बेटी एलिजाबेथ से पूछते हैं क्या वह खुश है ?तब उसकी बेटी कहती है कि हां वह खुश है। तब लेखक पूछते हैं कि आप क्यों खुश हैं। तब वह बताती है कि वह खुश है,पर उसे पता नहीं कि वह क्यों? वह बताती है कि जब स्कूल जाती है तब वह अपने मित्रों से मिलती है, उसे खुशी मिलती है। जब वह अपने अध्यापकों से मिलती है तब उसे खुशी मिलती है। जब छुट्टी के दिन घर पर अपने भाइयों और बहनों से तथा अन्य रिश्तेदारों से मिलती है तब वह खुशी महसूस करती है। लेखक कहते हैं बड़े लोगों की तुलना में बच्चे खुशी के ज्यादा विशेषज्ञ होते हैं।

 खुशी और खुश होना हमारे खुद के हाथ में है ।कई बार हम खुश होते हैं। फिर अचानक दूसरे की खुशी देखकर उसकी जितनी खुशी चाहते हैं। जिससे हम अपनी खुशी भूल जाते हैं या फिर हमें छोटी लगने लगती है।जिससे हम दुखी हो जाते हैं। तथा अपने सुख की तुलना उसके सुख से करते हैं जिससे अंततः में ईर्ष्या वह दुख प्राप्त होता है।

  1. न चिड़े,ना ही गुस्सा हो।

         कभी भी किसी से नहीं चिड़े। ना ईर्ष्या इत्यादि का भाव रखें। गुस्से से परहेज करना चाहिए ।गुस्से में हम सच गलत का भेद भूल जाते हैं उस समय हम जो देखते हैं उसी को सही मान लेते हैं जो कई बार गलत होता है।

  1. अच्छे परिणामों की उम्मीद करेंगे, तो अच्छे परिणाम मिलेंगे ।

     इसमें लेखक के पास एक पिता अपने 30 साल के असफल बेटे के भविष्य की चिंता करते हुए बात करते हैं वह कहते हैं कि आखिर मेरा बेटा कब सफल होगा। वह बार-बार क्यों असफल हो जा रहा है। तब लेखक उसे समझाते हैं की आप अच्छे परिणामों की उम्मीद कीजिए ।अपने बेटे में भरोसा रखिए तथा उसे खुद भरोसा रखना सिखाइए अवश्य ही अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे।

  1. मैं हारने में विश्वास नहीं करता ।

    लेखक इसमें बताता है कि एकदिन एक महिला अपने बेटे को अपने साथ लाती हैं और कहती हैं कि आप इसे सुधार दीजिए। इसका मन बिल्कुल भी पढ़ाई में नहीं लगता पता नहीं यह आगे क्या करेगा तब लेखक उनके बेटे से बात करता है और उसे समझाता है कि आखिर वह ऐसा क्यों है। लेखक उसी कहते हैं कि जब अब तुम पढ़ने लगना तब कहना कि, हे ईश्वर मैं जानता हूं कि मेरा दिमाग बहुत अच्छा है और मैं हर काम सफलतापूर्वक कर सकता हूं।इसके बाद तुम अपने अध्ययन को आगे बढ़ाना।

धीरे धीरे कुछ महीनों के बाद ही उस बालक में काफी परिवर्तन आया।

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आगे लेखक एक सेल्समैन और उनके पिता के बीच के वार्तालाप को वर्णन करता है। वह सेल्समैन के पिता कि ईश्वर के ऊपर भरोसा का जिक्र करता है। आगे वह कहते हैं की जाफरान जोकि यूएसए के काफी प्रतिभावान व्यक्ति हैं, वो कहते हैं कि हमेशा चीजों को चिकने हैंडल की तरफ से पकड़ना चाहिए। जिससे हमें न्यूनतम प्रतिरोध का सामना करना पड़े।प्रतिरोध से घर्षण पैदा होता है अतः आवश्यक है कि घर्षण को कम किया जाए।

  1. चिंता की आदत को कैसे छोड़े ।

      अनावश्यक चिंताओं दुविधा से हमें परहेज करना चाहिए। हमारे भारतीय समाज में कहावत है की चिंता चिता के समान है। अतः चिंता से बचना चाहिए।

  1. निजी समस्याएं सुलझाने की शक्ति‌।
  2.  इलाज में आस्था का प्रयोग कैसे करें।

     जब भी हम किसी से इलाज कराते हैं तब आस्था हमारी सही होने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हमें इलाज करने वाले में भरोसा रखना चाहिए।कई बार हम सुनी सुनाई बातों में भरोसा कर लेते हैं और एक पूर्व अनुमान लगा लेते हैं जो कई बार नुकसान दे होती है‌

  1.  जब उर्जा घटने लगे तो इस हेल्थ फार्मूले का को आजमाएं ।

   जब भी हमें लगे हमारी उर्जा घट रही है तब हमें कुछ एक्सरसाइज भोजन योगा अध्यात्म स्वाध्याय आत्म चिंतन इत्यादि का सहारा लेना चाहिए। इसमें लेखक कहते हैं कि जब उर्जा घटने लगी लगी लगे तब हमें कार्य के करने की तरीकों सोचने की नजरिए में भी कई बार बदलाव करना चाहिए।

  1. नजरिया बदल कर नए इंसान बने।
  2.  सहज ऊर्जा के लिए रिलैक्स रहे।
  3.  लोकप्रिय कैसे बने।
  4.  दिल के दर्द की दवा।
  5.  ईश्वर से शक्ति कैसे प्राप्त करें ।

 हमेशा ईश्वर में भरोसा रखें। किसी भी कार्य को करने से पहले तथा बाद में ईश्वर का स्मरण जरूर करना चाहिए । इश्वय  ही है जो हमें आगे बढ़ने की शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करते हैं।

     उपसंहार

  लेखक पूछते हैं अब आपने यह पुस्तक पूरी पढ़ ली है आपने इसमें क्या पढ़ा।

 सफल जीवन जीने की व्यवहारिक और काम में आने वाली कुछ तकनीकों और उदाहरण को इसमें संकलित किया गया है निश्चय ही यह आपकी परेशानियों को एक दफा दिशा प्रदान करेंगी।

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