सफलता की प्रसन्नता – हिंदी PDF। Happiness Of Success By Steve Marden In Hindi PDF-Free Download

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नकरात्मक विचारो से मुक्ति

डॉ. ओरिसन स्वेट मार्डेन

सफलता की प्रसन्नता पुस्तकडॉ. ओरिसन स्वेट मार्डेन की एक क्रांतिकारी रचना है। डॉ. ओरिसन स्वेट मार्डेन जन्म 11 जून 1848 को न्यू हैम्पशायर अमेरिका में हुआ था। उनका बचपन का नाम ओरिसन था।

ओरिसन का जीवन संघर्ष, दुःख से भरा हुआ था। ओरिसन जब तीन साल के हुए थे तब उनकी मां की मृत्यु हो गई थी। और सात साल की उम्र में पिता का देहांत हो गया था। यानी किशोरावस्था में पहुंचने से पहले ओरिसन अनाथ हो गए थे।

अपने शुरुवाती दिनों में मार्डन विज्ञान, कला, चिकित्सा और शैक्षणिक डिग्री हासिल की थी। अपने कॉलेज के दौरान मॉडर्न एक होटल में काम करके और बाद में एक रिसोर्ट के मालिक बन गए।

पुस्तक : सफलता की प्रसन्नता

लेखक : स्टेव मार्डेन

पुस्तक की भाषा : हिंदी

पेज : 11

सफलता की प्रसन्नता पुस्तक का विवरण

कहते है, जिस महापुरुष को अपने बचपन और किशोरावस्था में जिस चीज का अभाव रहता है, वे आगे चलकर उस क्षेत्र में अविष्कार करते है, स्वेट मार्डन के साथ भी ऐसा हुआ। उन्होंने अपने बचपन के अभाव से सीखकर, हताशा, निराशा को आशा से भर दिया। इतना बड़ा आदर्श और मिसाल कायम की, आनेवाली कई पीढ़ी अभाव और विपरीत परिस्थितियों में टूटे नहीं।

डॉ. ओरिसन स्वेट मार्डेन के अनुसार आप जितनी बार भी निराशा के आगे घुटने टेकते है, जितनी बार आप निरूतशाहित होते हैं, उतनी ही बार आप अपनी आशा, परिश्रम के भवन को नष्ट करते है, जिन्हे आप दिन- रात परिश्रम करके बनाया था।

एक पल के लिए यदि हमारे मन में निराशा आती है, तो हमारा पूरा दिनचर्या को बिगाड़ देती है। यदि मन में निराशा आती है, तो हमारा शरीर स्थिल, अकर्मण्य हो जाता है।

 मार्डेन कहते है, आप लोग में से अधिकतर लोग यह नहीं जानते है, की जितनी बार आपको निराशा के काले बादल आपको घेरती है, उतनी बार आपकी मानसिक शक्ति के साथ साथ शारीरिक शक्ति भी क्षीण होती है, आपके मन में अवांछित रसायनों से विषाक्त होता है, और वह विष आपके मास्तिक को भी दूषित कर देता है।

  “उठो, अपने जीवन की योजना बनाओ

ताकि तुम्हारी सोई हुई महान प्रतिभा और

शक्ति जो अब तक व्यर्थ पड़ी हुई है जाग उठे।

बच्चो को छोटी अवस्था में ही यह संज्ञान में यह बात लाना चाहिए की शत्रु केवल कोई व्यक्ति नहीं होता है, बल्कि शत्रु हमारे अंदर भी है, ऐसे अनेक भाव है, जो हमारे अंदर शत्रुता का कार्य करते है, बच्चो को यह पता होना चाहिए की किस मनोवृति को हमे अपने मन में स्थान देना चाहिए और किसे नहीं। उन्हें यह भी विदित होना चाहिए की कौन सा भाव रचनात्मक है, और जीवन को अधिक कार्य कुशल बनाते है, और कौन से मनोवृति हमारे सामर्थ्य को नष्ट करके, हमारे भविष्य को बिगाड़कर जीवन को अंधकारमय बना देते है। बच्चे को बाल्यकाल में यह भी शिक्षा देनी चाहिए की वे अपने विचारो, मनोवृत्तियों तथा भावनाओं को किस प्रकार वश में रखे और नियंत्रित भावनाओं से रावनात्मक कार्य कर सके।

ऐसा माना जाता है, की युवावस्था में किशोर और किशोरियां अधिक ऊर्जावान एवं आशावान होते है, यह बात सत्य है, किंतु किशोरावस्था में निराशा भी जल्दी कर लेती है। कई छात्र छात्राओं बोर्ड परीक्षा में आशा के विपरीत परिणाम आने के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते है। उन युवक युवतियों पर जब निराशा जैसी बाहरी शत्रु जब आक्रमण करते है, तो उनको भावी जीवन की अद्भुत संभावनाएं दिखाई नहीं देती है, जिसके के कारण अमुख युवक युवतियां के मन में ऐसे दूषित विचार आते है। और गलत कदम उठा लेते है।

युवावस्था के लिए डॉ. ओरिसन स्वेट मार्डेन का विचार।

किशोरावस्था बड़ा ही स्वर्णिम काल होता है, युवक युवतियों की भावनाएं  इसमें प्रबल ज्यादा होती है, इसी काल में कई बच्चे अपने समय का सदुपयोग करके अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर बन जाते है, तो कई बच्चे चोर, तथा नशे के लत में आकर अपना जीवन को विध्वंश कर लेते है।

इस पुस्तक में  स्वेट मार्डेन कहते है, युवा मित्रो जरा विचार करो

की तुम्हारे भविष्य में क्या है? आप स्वर्ग जैसे इस धरती पर आए है, यहां आपके सफलताओं का अद्भुत संभावना है ना जाने भविष्य में आप कितने महान उन्नति कर जाए। यदि आपके हाथ काम करने के लिए उतावले हैं, आपके मन में काम करने की इच्छा है तो आप क्या नहीं कर सकते हैं अब बड़े से बड़ा काम करने में समर्थ हो सकते हैं।

इस परिस्थिति में निराशा और निष्क्रियता को अपने पास पटकने ना दें या उन्हें अपने मन में स्थान देना एक अपराध है, एक ऐसा घोर अपराध है उसका परिणाम आपको स्वयं भोगना पड़ता है।

जब भी निराशा आप पर आक्रमण करें आपको दबाना चाहे तो आप अपने मन को दृढ़ रखिए। निराशा के आगे मन को झुकने नही दीजिए। अपने आदर्श को सदा सर्वोपरि रखिए। जब आपके मन में निराशा विरोधी विचार प्रबल होंगे तो निराशा के विचार आपके मन पर विजय प्राप्त नहीं कर सकेंगे आपके मन स्थान ना पा सकेंगे।

हम अपने विचारो को सकारात्मक कैसे बनाए।

स्वेट मार्डेन कहते है, निराशा एक मनोवृति है, हम अपने मन में निराशा को बड़ी आसानी से जगह दे देते है, जैसे की कोई मेहमान हो आएंगे और चले जायेंगे। लेकिन आपलोग ये नही जानते है, की धीरे- धीरे निराशा आपके शरीर में घर बना लेते है, और निराशा आपकी आदत बन जाति है।

निराशा को पहचानकर हम इस मनोवृति से छुटकारा पा सकते है, अपने मनोवृति को आशा को आशा से परिपूर्ण रखके उसका उपचार कीजिए तथा प्रयत्न कीजिए की जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण सकारात्मक हो जाए। ताकि निराशा कभी भी आपके अंदर प्रवेश नहीं कर पाए। अपने विचारो का चयन करे। नकरात्मक विचार, सकारात्मक विचार को अलग करे। इस तरह हम अपने जीवन को एक महान लक्ष्य की ओर अग्रसर कर सकते है।

पुस्तक का निष्कर्ष

डॉ. ओरिसन स्वेट मार्डेन की पुस्तक सफलता की प्रसन्नता एक क्रांतिकारी पुस्तक है। इसके विचार न जाने कितने नकरात्मक विचारो से पीड़ित व्यक्ति को महान शख्सियत बनाया है। इस पुस्तक को पढ़ने से व्यक्ति का मनोदशा बदल जाती है, सबकुछ सुंदर दिखने लगता है। कार्य करने की क्षमता बढ़ जाती है। व्यक्ति अपने आप को ऊर्जावान महसूस करता है। व्यक्ति के विचारो में आमूलचूल परिवर्तन आता है। इस पुस्तक को पढ़ने के बाद आप नकारात्मक और सकारात्मक विचार में अंतर करना सीख जाएंगे। इसलिए इस पुस्तक को जीवन में कम से कम एक बार जरूर पढ़े।

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