श्री दुर्गासप्तशती पाठ | durga saptashati path pdf in hindi

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Durga saptashati path pdf

Friends, today we have brought for you Shri Durga Saptashati PDF in Hindi in which we will get to read you Shri Durga Maa Aarti in PDF and the method of worshiping Durga Maa etc. Shri Durga Saptashati Path which is a scripture of worship of a goddess made by collecting 7 verses. Whose recitation daily, Maa Durga fills the store of happiness and prosperity in the lives of her devotees.

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श्री दुर्गा सप्तशती पाठ

दोस्तों हम आज आपके लिए लेकर आए हैं श्री दुर्गा सप्तशती पीडीएफ durga saptashati pdf इन हिंदी जिसमें हम आपको श्री दुर्गा मां की आरती पीडीएफ में और दुर्गा मां की पूजा की विधि आदि पढ़ने को मिलेंगे। श्री दुर्गा सप्तशती पाठ जो कि 7 श्लोकों को इकट्ठा करके बनाया गया एक देवी की उपासना का ग्रंथ है। जिसका रोज पाठ करने से मां दुर्गा अपने भक्तों के जीवन में सुख और समृद्धि का भंडार भर देती है।

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हिंदी में दुर्गा सप्तशती संपूर्ण पाठ pdf । Durga Sapatashati path PDF in hindi

शक्ति के बिना देवता भी मृत शरीर के समान होते हैं। दुनिया की हर संस्कृति और सभ्यता में शक्ति की उपासना होती है। जननी जन्म देने वाली करुणा की साक्षात मूर्ति होती है और अपने संतान के सुखों को वह बहुत ही सरलता से ध्यान रखती है।

किस ग्रंथ में बताए गए नियमों और देवी की उपासना करने से भक्तों की हर इच्छाएं पूर्ण होती है। यह ग्रंथ मार्कंडेय पुराण का एक बहुत ही महत्वपूर्ण भाग है।  durga saptashati path pd यह ग्रंथ कथा के रूप में दिखने वाला प्रत्येक पृष्ठ तंत्र और गुप्त बीज मंत्रों को समेटे हुए है। संस्कृत भाषा में दुर्गा सप्तशती ग्रंथ का एक बहुत ही विशेष स्थान है।

दुर्गा सप्तशती का पाठ कैसे करें  durga saptashati pdf ka path

प्रातः काल स्नान आदि से निवृत होकर शुद्ध वस्त्र धारण करके और तांबे के लोटे में जल लेकर घर में मंदिर में अथवा कहीं एकांत स्थान में बैठकर जल के छींटे देकर आसन को पूर्ण रूप से शुद्ध करके बैठ जाएं और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए अपने ऊपdurga saptashatiर जल के छींटे दें और उसके बाद तीन बार अपने मुख में जल के छींटे दें और आप से संभव हो तो एक दीपक जला कर रखें।

सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा करें फिर वरुण सूर्य आदि नवग्रहों को मन में प्रणाम करें और माता भगवती देवी दुर्गा की मूर्ति अथवा चित्र के ऊपर दीप, धूप ,फल ,माला ,मिठाई आदि भक्ति भाव से पूजा करें और उसके बाद में मन को एकाग्र करते हुए मां भगवती का ध्यान करके उन्हें श्रद्धा पूर्वक प्रणाम करें।

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इसके बाद पाठ को आरंभ करें, कवच, तिलक ,अर्गला ,रात्रि सूक्त का पाठ करते हुए कर्म से है 13 अध्यायों का पाठ करें। और अंत में आरती एवं क्षमा प्रार्थना करें यह संपूर्ण पाठ की विधि है।

यदि पूरा पाठ आप से संभव न हो तो केवल कवच और मध्यम durga saptashati चरित्र अर्थात दूसरा तीसरा चौथा आदि अध्याय का भी पाठ किया जा सकता है परंतु आपको सावधानी रखनी चाहिए कि अध्याय पढ़ते समय बीच में कुछ भी नहीं बोले और यदि बोलना पड़े तो उस अध्याय का पाठ आपको फिर से करना चाहिए इस प्रकार से पाठ करने से मां भगवती अपने भक्तों की सभी इच्छाएं और मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

अगर इस विधि से दुर्गा सप्तशती को दस बार पढ़ा जाए तो दस चंडी यज्ञ माना जाता है और सौ बार पढ़ा जाए तो शतचंडी यज्ञ और हजार बार पढ़ा जाए तो सहस्त्र चंडी यज्ञ और एक लाख पाठ किया जाए तो लक्ष्य(लाख)चंडी यज्ञ माना जाता है।

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श्री दुर्गा सप्तशती मुख्य रूप से संस्कृत भाषा में ही उपलब्ध है परंतु आज हिंदी भाषा में भी यह उपलब्ध है क्योंकि पहले संस्कृत भाषा में यज्ञ आदि काम होते थे परंतु अभी समय के अनुसार हिंदी भाषा में भी आपकी सुविधा के लिए यह उपलब्ध है।

संगीत के साथ विशेष कार्यों और अनेक धार्मिक मौकों पर यह पाठ किया जाता हैdurga saptashati  ज्यादा से ज्यादा संख्या में एकत्रित होकर सामूहिक रूप से इस का पाठ को पढ़ने से अधिक लाभ मिलता है।

दुर्गा सप्तशती का पाठ संपूर्ण करने से यज्ञ हवन करना चाहिए। सनातन संस्कृति के अनुसार कोई भी विशेष कार्य या कोई पाठ आदि करने पर उसको समापन करने के लिए हवन आदि किया जाता है। ॐ ऐं ह्लीं क्लीं चामुंडायै विच्चे स्वाहा ” इस मंत्र से माला जाप करते हुए हवन करना चाहिए। हवन की पूर्णाहुति गरी के गोले से प्रदान करनी चाहिए। पाठ के समापन पर विशेष महत्व है कि ब्राह्मण कन्याओं को भोजन कराया जाए। क्षत्रिय युद्ध में विजय के लिए वेस्य धन की प्राप्ति के लिए और शेष समस्त सुखों की प्राप्ति के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ और पूजन करता है।

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